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“सिर्फ ज्ञान नहीं परिणाम के लिए भी हो अध्ययन”

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टॉपर्स कॉन्क्लेव में बुद्धिजीवियों ने छात्रों को किया प्रेरित

इंटरनेट में माध्यम से आज पूरी दुनिया के लोग एक दूसरे से कनेक्ट: प्रो. दुर्गेश पंत

देहरादून। राजभवन में आयोजित हो रहे टॉपर्स कान्क्लेव के दूसरे दिन के पहला सत्र राज्यपाल डॉ. के.के. पाल की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। पहले सत्र की अध्यक्षता दून विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सी.एस. नौटियाल ने की।
दूसरे दिन के प्रथम सत्र में उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल (से.नि.) आनन्द सिंह रावत ने ‘रियलाईजिंग यॉर ड्रीम्स’ विषय पर बोलते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। मे.ज. रावत ने कहा कि अक्सर अभिभावक अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर या टीचर बनने के लिए प्रेरित करते हैं, मगर एक सच्चाई ये भी है कि ज्यादातर सफल वही होते हैं, जो थोड़ा हटकर कार्य करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी ताकत, क्षमता, कमजोरी और अवसरों को पहचानने की सलाह दी। मे.ज. रावत ने सफलता के लिए 7 बातों पर ध्यान देने की बात कही। इसमें अध्ययन, ज्ञान के लिए ना कि परिणाम के लिए, क्रिएटिव थिंकिंग, शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत होना, प्रेरणा और दृढ़निष्चय और टाईम मैनेजमेंट जैसी बातें शामिल हैं।
इसके उपरान्त प्रो. दुर्गेश पंत ने ”रिबूटिंग लर्निंग इन ऐन एरा ऑफ साईबर रिजीम एंड आई.ओ.टी.” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर सीखने के लिए अवलोकन बहुत महत्वपूर्ण होता है। मानवजाति ने अवलोकन करके ही बहुत सी बातें सीखी हैं, तब जाकर जीवन जीना सम्भव हुआ है। शुरूआत में भाप की शक्ति का ज्ञान होने से विकास को गति मिली, फिर विद्युत और बाद में कम्प्यूटर के आ जाने से इसमें बहुत तेजी आयी। प्रो. पंत ने कहा कि अब इंटरनेट के आ जाने के बाद आज पूरी दुनिया के लोग एक दूसरे से जुड़ गए हैं। आज सीखने के लिए बहुत सी ऑनलाईन साईट्स मिल जाएंगी। ज्ञान पाने के लिए अब बहुत से साधन उपलब्ध हैं। इंटरनेट के माध्यम से हम दुनिया के किसी भी विषय के विशेषज्ञ के व्याख्यानों को देख व सुन कर सीख सकते हैं। आज हमारे पास संसाधन मौजूद हैं।
दूसरे दिन के द्वितीय सत्र में महानिदेशक यूकॉस्ट डॉ. राजेन्द्र डोभाल ने ”बौद्धिक सम्पदा अधिकार” विषय पर बोलते हुए पेटेंट, कॉपीराईट और ट्रेडमार्क के विषय में विस्तृत जानकारी दी। सत्र के अंत में छात्र-छात्राओं ने विषयों से सम्बन्धित अपने अनुभव भी साझा किए। श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय की श्रेया वशिष्ठ ने बौद्धिक सम्पदा को पेटेंट अथवा कॉपीराईट आदि से सुरक्षित रखने में ध्यान रखने वाली बातों की जानकारी दी। उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के नितिन आर्य ने कहा कि बहुत से ऐसे आविष्कार हैं जो भारत में बहुत पहले ही हो चुके थे। महर्षि पाणिनी के अष्टाध्यायी में भी बौद्धिक सम्पदा के अधिकार के विषय में जानकारी दी गयी है।




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